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रामभरोसे (हास्य व्यंग )

रामभरोसे (हास्य व्यंग )
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रामभरोसे (हास्य व्यंग )
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रामभरोसे मेरे संप्रभुता सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य की प्राथमिक इकाई है , उसने हाल ही १८ की उमर पार की है, संविधान उसे मताधिकार दे गया है । इसी के साथ मुंआ महत्वपूर्ण वोटर बन गया है ।......................................इन्हीं अनुभवों से मेरी ढ़ृड आस्था बन गई है कि हमारा लोकतंत्र रामभरोसे की सूझबूझ पर ही जिंदा है, राम करे कि रामभरोसे की सूझबूझ ऐसी ही बनी रहे और हर बार नये सिरे से उल्लू बनने के लिये रामभरोसे के द्वारा ,रामभरोसे के मालिकों के लिये ,रामभरोसे के नेताओं का शासन यूं ही चलता रहे।...........................रामभरोसे व्यंग संग्रह से अंशअनेक सामाजिक विषयो पर सरल भाषा में बेहद पैने पर गुदगुदाते और आइना दिखाते व्यंग लेख इस पुस्तक में हैं , जिन्हें जितनी भी बार पढ़ो हर बार नया आनंद मिलता है . ..

Book Details

Pustak Details
AuthorVivek Ranjan Shrivastava
ISBN-139788188796285
FormatPaperback
LanguageHindi

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Book Description

रामभरोसे मेरे संप्रभुता सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य की प्राथमिक इकाई है , उसने हाल ही १८ की उमर पार की है, संविधान उसे मताधिकार दे गया है । इसी के साथ मुंआ महत्वपूर्ण वोटर बन गया है ।.................
.....................इन्हीं अनुभवों से मेरी ढ़ृड आस्था बन गई है कि हमारा लोकतंत्र रामभरोसे की सूझबूझ पर ही जिंदा है, राम करे कि रामभरोसे की सूझबूझ ऐसी ही बनी रहे और हर बार नये सिरे से उल्लू बनने के लिये रामभरोसे के द्वारा ,रामभरोसे के मालिकों के लिये ,रामभरोसे के नेताओं का शासन यूं ही चलता रहे।.................

..........रामभरोसे व्यंग संग्रह से अंश
अनेक सामाजिक विषयो पर सरल भाषा में बेहद पैने पर गुदगुदाते और आइना दिखाते व्यंग लेख इस पुस्तक में हैं , जिन्हें जितनी भी बार पढ़ो हर बार नया आनंद मिलता है .

 

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