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रामभरोसे (हास्य व्यंग )

रामभरोसे (हास्य व्यंग )
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रामभरोसे (हास्य व्यंग )
  • Author Name: Vivek Ranjan Shrivastava,
  • ISBN: 9788188796285
  • Edition: 1st Edition
  • Book Language: Hindi
  • Available Book Formats:Paperback
Product Views: 1566
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Reward Points: 260
रामभरोसे मेरे संप्रभुता सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य की प्राथमिक इकाई है , उसने हाल ही १८ की उमर पार की है, संविधान उसे मताधिकार दे गया है । इसी के साथ मुंआ महत्वपूर्ण वोटर बन गया है ।......................................इन्हीं अनुभवों से मेरी ढ़ृड आस्था बन गई है कि हमारा लोकतंत्र रामभरोसे की सूझबूझ पर ही जिंदा है, राम करे कि रामभरोसे की सूझबूझ ऐसी ही बनी रहे और हर बार नये सिरे से उल्लू बनने के लिये रामभरोसे के द्वारा ,रामभरोसे के मालिकों के लिये ,रामभरोसे के नेताओं का शासन यूं ही चलता रहे।...........................रामभरोसे व्यंग संग्रह से अंशअनेक सामाजिक विषयो पर सरल भाषा में बेहद पैने पर गुदगुदाते और आइना दिखाते व्यंग लेख इस पुस्तक में हैं , जिन्हें जितनी भी बार पढ़ो हर बार नया आनंद मिलता है . ..

Book Details

Pustak Details
Author Vivek Ranjan Shrivastava
ISBN-13 9788188796285
Format Paperback
Language Hindi

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Book Description

रामभरोसे मेरे संप्रभुता सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य की प्राथमिक इकाई है , उसने हाल ही १८ की उमर पार की है, संविधान उसे मताधिकार दे गया है । इसी के साथ मुंआ महत्वपूर्ण वोटर बन गया है ।.................
.....................इन्हीं अनुभवों से मेरी ढ़ृड आस्था बन गई है कि हमारा लोकतंत्र रामभरोसे की सूझबूझ पर ही जिंदा है, राम करे कि रामभरोसे की सूझबूझ ऐसी ही बनी रहे और हर बार नये सिरे से उल्लू बनने के लिये रामभरोसे के द्वारा ,रामभरोसे के मालिकों के लिये ,रामभरोसे के नेताओं का शासन यूं ही चलता रहे।.................

..........रामभरोसे व्यंग संग्रह से अंश
अनेक सामाजिक विषयो पर सरल भाषा में बेहद पैने पर गुदगुदाते और आइना दिखाते व्यंग लेख इस पुस्तक में हैं , जिन्हें जितनी भी बार पढ़ो हर बार नया आनंद मिलता है .

 

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