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Nayee Kitab Prakashan

उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है। देखिए पाते हैं उशशाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ इक बराह्मन ने कहा है कि ये साल अच्छा है। हमको मालूम है जन्नत की हक़ीकत लेकिन दिल के ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है।..
₹140 ₹175
पुस्तक के लिखने में मैंने केवल एक बात का अधिक से अधिक ध्यान रखा है और वह है ईमानदारी, सचाई । घटनाएँ जैसे–जैसे याद आती गयी हैं, मैं उन्हें लिखती गयी हूँ । उन्हें सजाने का मुझे न तो अवकाश था और न साहस । इसलिए हो सकता है कहीं–कहीं पहले की घटनाएँ बाद में और बाद की घटनाएँ पहले आ गयी हों । यह भी हो सकता ह..
₹220 ₹275
भूमंडलीकरण के पूर्व तक हिंदी सिनेमा में दलित, स्त्री, किन्नर, आदिवासी आदि हाशिए पर खड़े समाज को केवल पात्र बनाकर पेश किया जाता था । फिल्में केवल उनके जीवन से जुड़ी समस्या को ही उठाती थीं । उनके अंदर के प्रतिरोध को व्यापक रूप में नहीं दिखाया जाता था । मैंने जिन फिल्मों पर विचार किया है उनमें प्रतिरोध क..
₹160 ₹200
पिता : जोहन प्रजापति माता ; मुनरी देवी जन्म : आजमगढ़, उत्तर प्रदेश शिक्षा ; बी–ए एवं एम–ए– (हिंदी), हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली । अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से हिंदी सिनेमा पर एम–फिल एवं पीएच–डी– सम्पादन : हिंदी सिनेमा : बिम्ब प्रतिबिंब, शिल्पायन प्रकाशन दिल्ली । छ: अन्य पुस्तकों का..
₹80 ₹100
यह पुस्तक पाकिस्तान में बालाकोट के जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर हवाई हमले के बारे में ­ कई नए खुलासे लेकर आई है। यह ऐसे सवालों के जवाब भी खोज रही है जो अभी तक लोगों के सामने नहीं आ पाए। मसलन.... वह क्या कारण था कि इस एयर स्ट्राइक के लिए रात साढ़े तीन बजे का वक्त चुना गया? किस हवाई मार्ग से भारतीय विमान..
₹120 ₹150
बोलती फिल्मों का दौर आने तक फिल्म अभिनय को एक सम्मानजनक पेशा नहीं समझा जाता था, इसलिये नारी पात्रों के लिये लड़कियाँ नहीं मिल पाती थीं और नौजवान लड़कों को ही जनाना मेकअप करके काम चला लिया जाता था । धीरे–धीरे इन पात्रों के लिये नाच–गाने के पेशे वाली लड़कियों को लिया जाने लगा । उन दिनों यह समस्या भी पेश ..
₹120 ₹150
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