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मेरे प्रिय व्यंग लेख

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मेरे प्रिय व्यंग लेख
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मेरे प्रिय व्यंग लेखव्यंग ऐसी विधा है जिसके द्वारा कटाक्ष और परिहास के माध्यम से वह सब भी कहा जा सकता है जो सीधे सीधे कहना संभव नही होता ,समाज की विसंगतियो पर गुदगुदाते हुये प्रहार करके सुधार का रास्ता दिखलाना व्यंगकार का दायित्व होता है .  विवेक रंजन श्रीवास्तव जी व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर हैं , उन्हें व्यंग लेखन के लिये अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं . इस पुस्तक में उन्होने समसामयिक विषयो पर अपने प्रिय व्यंग लेख प्रस्तुत किये हैं .  आतंक की विश्व व्यापी समस्या पर व्यंग करते हुये वे आतंकवाद के लाभ व्यंग में लिखते हैं कि आतंकवाद के विरोध में दुनियां एकजुट हो रही है , जहां दो राष्ट्राध्यक्ष मिले यदि और किसी मुद्दे पर सहमति न बने तो कम से कम आतंकवाद पर सहमती की घोषणा की ही जा सकती है . जातिवाद की संकीर्णता पर प्रहार करता व्यंग भगवान कृष्ण का अपहरण हंसाता भी है और समाज की दुर्दशा पर  रुल..
Pustak Details
AuthorVivek Ranjan Shrivastav
ISBN-139789380608143
FormatPaperback
LanguageHindi

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Book Description

मेरे प्रिय व्यंग लेख

व्यंग ऐसी विधा है जिसके द्वारा कटाक्ष और परिहास के माध्यम से वह सब भी कहा जा सकता है जो सीधे सीधे कहना संभव नही होता ,समाज की विसंगतियो पर गुदगुदाते हुये प्रहार करके सुधार का रास्ता दिखलाना व्यंगकार का दायित्व होता है .  विवेक रंजन श्रीवास्तव जी व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर हैं , उन्हें व्यंग लेखन के लिये अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं . इस पुस्तक में उन्होने समसामयिक विषयो पर अपने प्रिय व्यंग लेख प्रस्तुत किये हैं .  आतंक की विश्व व्यापी समस्या पर व्यंग करते हुये वे आतंकवाद के लाभ व्यंग में लिखते हैं कि आतंकवाद के विरोध में दुनियां एकजुट हो रही है , जहां दो राष्ट्राध्यक्ष मिले यदि और किसी मुद्दे पर सहमति न बने तो कम से कम आतंकवाद पर सहमती की घोषणा की ही जा सकती है . जातिवाद की संकीर्णता पर प्रहार करता व्यंग भगवान कृष्ण का अपहरण हंसाता भी है और समाज की दुर्दशा पर  रुलाता भी है .

 

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