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Vani Prakashan

Publisher: Vani Prakashan by: Edited by Avinash Mishra
यह 'लल्लनटॉप कहानी कॉम्पिटिशन' के तीसरे संस्करण में सामने आयी 16 कहानियों की किताब है। कहानियों की दुनिया अजीब है और यह दुनिया सामने के सच को सूचना की तरह नहीं, कल्पनाशीलता के साथ सुनाने की माँग करती है। जब यह माँग किसी प्रतियोगिता से जुड़ जाती है, तब प्रसंग कुछ और खास हो जाता है। इस अर्थ में 'लल्लन..
₹103 ₹125
Publisher: Vani Prakashan by: Uday Prakash
'अपने समय के बेचैन यथार्थ पर सदा पैनी निगाह रखने वाले उदय प्रकाश 'प्रतिरोध के यथार्थ' के भारतीय स्तर के प्रतिबद्ध लेखक हैं। सन्त तुकाराम और प्रेमचन्द की परम्परा के संवाहक उदय प्रकाश शब्द का प्रयोग शस्त्र की तरह करते हैं।' -सतीश कालसेकर / 'शक्तिशाली सत्ता के नाम एक 'चिट्ठी'। निजी नहीं, सार्वजनिक। जिस..
₹163 ₹199
Publisher: Vani Prakashan by: Anamika
ज्ञान की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए आप जिस संज्ञान तक पहुँचते हैं, शब्दों की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए जिस गहन मौन तक, मेरा अकेलापन आपके अकेलेपन से जहाँ रू-ब-रू होता है, कविता वहीं एक चटाई-सी बिछाती है कि पदानुक्रम टूट जायें, भेद-भाव की सारी संरचनाएँ टूट जायें, एक धरातल पर आ बैठे दुनिया के सारे ध्रुवान्त-आपबीती और..
₹185 ₹225
Publisher: Vani Prakashan by: Anamika
जो बातें मुझको चुभ जाती हैं, मैं उनकी सूई बना लेती हूँ। बहुत बचपन से यह एहसास मेरे भीतर थहाटें मारता रहा कि मेरे भीतर के पानियों में एक विशाल नगर डूबा हुआ है-कुछ स्तूप, कुछ ध्वस्त मूर्तियाँ, कुछ दीवारें, पत्थर के बरतन...वगैरह! कुछ लोग हैं, खासकर कुछ स्त्रियाँ जो चुपचाप एक ही दिशा में देख रही हैं लेक..
₹324 ₹395
Publisher: Vani Prakashan by: Anamika
जो बातें मुझको चुभ जाती हैं, मैं उनकी सूई बना लेती हूँ। बहुत बचपन से यह एहसास मेरे भीतर थहाटें मारता रहा कि मेरे भीतर के पानियों में एक विशाल नगर डूबा हुआ है-कुछ स्तूप, कुछ ध्वस्त मूर्तियाँ, कुछ दीवारें, पत्थर के बरतन...वगैरह! कुछ लोग हैं, खासकर कुछ स्त्रियाँ जो चुपचाप एक ही दिशा में देख रही हैं लेक..
₹245 ₹299
Publisher: Vani Prakashan by: Anamika
मार्क्सवाद का अन्तःसंगीत बनकर प्रगतिवादी कविता उभरी, आधुनिकता का अन्तःसंगीत बनकर प्रयोगवादी कविता-इन दोनों के पहले स्वाधीनता आन्दोलन का अन्तःसंगीत छायावादी और छायावादोत्तर कविता में मुखरित हुआ। महाप्रमेयों के ध्वंस के बाद अस्मिता आन्दोलन परवान चढ़े तो नेग्रीच्यूड को जैसा बल अश्वेत कविता से मिला, वैस..
₹163 ₹199
Publisher: Vani Prakashan by: Anamika
हमारा शहर शाम सात बजे मच्छरदानियाँ तानना शुरू कर देता! घर के बरामदे पर ही सारी खाटें निकाली जाती और मुसहरी का एक सिरा अमरूद के पेड़ की डाल पर, एक बिजली के खम्भे पर, एक इस दरवाज़े की सिटकनी पर, दूसरा पड़ोस के दरवाज़े की। थोड़ी हम लुकाछिपी खेलते, थोड़ी देर माता-पिता के साथ कविता की अन्त्याक्षरी, फिर ज..
₹226 ₹275
Publisher: Vani Prakashan by: Anamika
हमारा शहर शाम सात बजे मच्छरदानियाँ तानना शुरू कर देता! घर के बरामदे पर ही सारी खाटें निकाली जाती और मुसहरी का एक सिरा अमरूद के पेड़ की डाल पर, एक बिजली के खम्भे पर, एक इस दरवाज़े की सिटकनी पर, दूसरा पड़ोस के दरवाज़े की। थोड़ी हम लुकाछिपी खेलते, थोड़ी देर माता-पिता के साथ कविता की अन्त्याक्षरी, फिर ज..
₹144 ₹175
Publisher: Vani Prakashan by: Vijay Tendlukar Translated by Marathi to Hindi by Dr. Damodar Kh
Ghasiram Kotwal..
₹163 ₹199
Publisher: Vani Prakashan by: Arun Kumar
Hindi Sahitya : Parampara Aur Prayog..
₹369 ₹450
Publisher: Vani Prakashan by: Abhay Kumar Dubey
विमर्श-नवीसी (डिस्कोर्स मैपिंग) की शैली में लिखे गये इस लम्बेनिबंध का मक़सद बहुसंख्यकवाद विरोधी विमर्श के भीतर चलने वाली ज्ञान की राजनीति को सामने लाना है। यह निबंध इस विमर्श के उस हिस्से को मंचस्थ और मुखर भी करना चाहता है जिसे इस राजनीति के दबाव में पिछले चालीस साल से कमोबेश पृष्ठभूमि में रखा गया ह..
₹451 ₹550
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