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Vivek Ranjan Shrivastav

आक्रोशयुवाओ के आक्रोश भरे स्वर समाज को जीवंत बनाये रखने के लिये आवश्यक होते हैं . इस पुस्तक में छोटी छोटी नई कवितायें संग्रहित हैं , सहज सरल प्रतीको के माध्यम से इस संग्रह की हर कविता एक शब्द चित्र बनाती है , और समाज की विसंगतियो को रेखांकित करती है . कविता के अंत में समस्या का समाधान भी कवि ने बताय..
₹26 ₹35
जिस तरह बचपन में हमें चिढ़ाया जाता था कि कौआ कान ले गया और हम सच को समझे बगैर कौऐ की ओर देखने लगते थे , उसी तरह आज समाज में अफवाहें फैलती हैं , नेता गुमराह करते हैं , मीडिया शोर करता है और सच को जाने समझे बिना लोग दौड़ पड़ते हैं . यह ५स किताब के एक व्यंग लेख का विषय है .ऐसे ही अनेक विषयो को व्यंग के सम..
₹45 ₹60
बिजली का बदलता परिदृश्यबिजली का एक बटन दबाते ही हमारी दुनिया बदल जाती है. अन्धेरा दूर हो जाता है.ज़रूरत के मुताबिक या तो गर्मी छू मंतर हो जाती है या ठण्ड अपना दामन समेट लेती है.बिजली हमारे जीवन के लिए किसी सौगात से कम नहीं है.लेकिन इस वैज्ञानिक सौगात के बारे में अभी तक हिंदी में बहुत ज़्यादा  जान..
₹128 ₹150
मेरे प्रिय व्यंग लेखव्यंग ऐसी विधा है जिसके द्वारा कटाक्ष और परिहास के माध्यम से वह सब भी कहा जा सकता है जो सीधे सीधे कहना संभव नही होता ,समाज की विसंगतियो पर गुदगुदाते हुये प्रहार करके सुधार का रास्ता दिखलाना व्यंगकार का दायित्व होता है .  विवेक रंजन श्रीवास्तव जी व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर हैं ..
₹53 ₹70
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