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Media Ki Bhasha Leela- Hardcover

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मीडिया की भाषालीला जन-माध्यम के आर-पार अध्ययन की एक दलील है, चूँकि उनकी परस्पर निर्भरता ऐतिहासिक तौर पर लाजि़मी साबित होती है। यह सही है कि राष्ट्र के बदलते भूगोल के साथ-साथ संस्कृति को देखने-परखने के नज़रिए में बदलाव आते हैं, लेकिन आधुनिक मीडिया-तकनीक और बाज़ार लोकप्रिय संस्कृतियों की आवाजाही के ऐसे साधन मुहैया कराते हैं, जिन पर राष्ट्रीय भूगोल की फौरी संकीर्णता हावी नहीं हो पाती। सरहदों के आर-पार लेन-देन चलता रहता है, चाहे वे सरहदें भाषा की हों, क्षेत्र-विशेष की, राष्ट्र की, या फिर मीडिया की अपनी गढ़ हुई। छापाखाना लोकप्रिय सिनेमा के लिए कितना अहम है, यह सिने-पत्रकारिता के इतिहास से ज़ाहिर है, ठीक उसी तरह जैसे कि दक्षिण एशिया में सिनेमा को 'सुनने का तगड़ा रिवाज़ रहा है, जिसके चलते सिनेमा के इतिहास को रेडियो के इतिहास से जोड़कर देखना नैसर्गिक लगता है। साहित्य-आधारित सिनेमा पर बातें करने की..

Book Details

Pustak Details
Sold ByVani Prakashan
AuthorRavikant
ISBN-139789352295111
FormatHardcover
LanguageHindi
Pages180 Pages
Publication Year2016

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Book Description

मीडिया की भाषालीला जन-माध्यम के आर-पार अध्ययन की एक दलील है, चूँकि उनकी परस्पर निर्भरता ऐतिहासिक तौर पर लाजि़मी साबित होती है। यह सही है कि राष्ट्र के बदलते भूगोल के साथ-साथ संस्कृति को देखने-परखने के नज़रिए में बदलाव आते हैं, लेकिन आधुनिक मीडिया-तकनीक और बाज़ार लोकप्रिय संस्कृतियों की आवाजाही के ऐसे साधन मुहैया कराते हैं, जिन पर राष्ट्रीय भूगोल की फौरी संकीर्णता हावी नहीं हो पाती। सरहदों के आर-पार लेन-देन चलता रहता है, चाहे वे सरहदें भाषा की हों, क्षेत्र-विशेष की, राष्ट्र की, या फिर मीडिया की अपनी गढ़ हुई। छापाखाना लोकप्रिय सिनेमा के लिए कितना अहम है, यह सिने-पत्रकारिता के इतिहास से ज़ाहिर है, ठीक उसी तरह जैसे कि दक्षिण एशिया में सिनेमा को 'सुनने का तगड़ा रिवाज़ रहा है, जिसके चलते सिनेमा के इतिहास को रेडियो के इतिहास से जोड़कर देखना नैसर्गिक लगता है। साहित्य-आधारित सिनेमा पर बातें करने की रिवायत पुरानी है, लेकिन यह देखने का व$ञ्चत आ गया है कि सिनेमा ने साहित्य की शैली, उसकी भाषा पर कौन से असरात छोड़े। और अपने आरंभिक दौर में वैश्विक इंटरनेट का हिंदी आभासी जगत कैसा लगता था? ऐसे ही कुछ सवालों और खयालों को कुरेदता है यह संकलन, जिसके केंद्र में हमारी-आपकी भाषा है।

 


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