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Maya - Hindi

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Maya - Hindi
  • ISBN: 9789385440274
  • Total Pages: 168 Pages
  • Edition: 1st Edition
  • Book Language: Hindi
  • Available Book Formats:Paperback
  • Year: 2016
  • Publication Date: 2016-09-15
  • Stock Status: In Stock
  • Publisher/Manufacturer: Petal Publishers
  • ISBN-13: 9789385440274

  • Categories:
  • Literature & Fiction
  • Hindi
No. Of Views: 1078
₹113
₹150
Reward Points: 400
कुछ कहानियों की शुरूआत ही उनके अंत से होती है । जहां ये बताना मुश्किल होता है कि कौन सही था, कौन गलत... किसने खोया, किसने पाया... कौन जीता और कौन हारा । माया की कहानी भी ऐसी ही है ।माया – एक आम सी लड़की, जैसी की बाकी की आम लड़कियां होती हैं । उसके छोटे-छोटे से सपने हैं और उन्‍हीं सपनों में से एक सपना है अपने प्यार को अपना जीवन साथी बनाना ।  सच्चा प्यार उसकी ज़िंदगी में दो बार आता है –पहली बार तुषार और दूसरी बार सैम के रूप में । लेकिन हर बार जब वह अपने प्यार को पाने से एक कदम दूर होती है,  ज़िंदगी अपनी चाल चल जाती है । लेकिन माया लड़ती है अपनी किस्मत से और उन अपनों से भी, जिन्हें देख कर दुश्मन भी शर्मिंदा हो जाएं । क्या माया अपने प्यार को पाने में कामयाब होती है?जीत सच्चाई की होती है या धोखे की?प्यार की होती है या नफ़रत की?सवाल भी इसी कहानी में हैं और जवाब भी । “माया -–प्यार जब पागलपन बन जा..
Pustak Details
Sold ByPetal Publishers
AuthorPooja Agrawal
ISBN-139789385440274
FormatPaperback
LanguageHindi
Pages168 Pages
Publication Date2016-09-15
Publication Year2016

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Book Description

कुछ कहानियों की शुरूआत ही उनके अंत से होती है । जहां ये बताना मुश्किल होता है कि कौन सही था, कौन गलत... किसने खोया, किसने पाया... कौन जीता और कौन हारा । माया की कहानी भी ऐसी ही है ।

माया – एक आम सी लड़की, जैसी की बाकी की आम लड़कियां होती हैं । उसके छोटे-छोटे से सपने हैं और उन्‍हीं सपनों में से एक सपना है अपने प्यार को अपना जीवन साथी बनाना ।  सच्चा प्यार उसकी ज़िंदगी में दो बार आता है –पहली बार तुषार और दूसरी बार सैम के रूप में । लेकिन हर बार जब वह अपने प्यार को पाने से एक कदम दूर होती है,  ज़िंदगी अपनी चाल चल जाती है । लेकिन माया लड़ती है अपनी किस्मत से और उन अपनों से भी, जिन्हें देख कर दुश्मन भी शर्मिंदा हो जाएं । 


क्या माया अपने प्यार को पाने में कामयाब होती है?

जीत सच्चाई की होती है या धोखे की?

प्यार की होती है या नफ़रत की?


सवाल भी इसी कहानी में हैं और जवाब भी । “माया -–प्यार जब पागलपन बन जाए”   


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