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Adbhut Prem ki Vichitra Katha - Hardcover

Adbhut  Prem ki  Vichitra  Katha - Hardcover
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Adbhut Prem ki Vichitra Katha - Hardcover
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डैनी अमीरों का नौशा बनकर दूर कहीं चमकते सितारे से उठी झंकार के साथ बह गया था। झंकार खत्म नहीं हुई थी, पर उसका बहना ठहर गया था। उसके पैर जम रहे थे और हालाँकि दूर सितारे की सदा उसके जेहन में अब भी गूँज रही थी, पर उसकी कंपन अब महसूस नहीं हो रही थी। डैनी ने गिरिजा को बेहद चाहा था। उसका साथ पाकर उसे लगा था कि दुनिया में उससे बड़ा खुशनसीब कोई नहीं था। वह गिरिजा में घुला जा रहा था, पर बुलावा उसको खींचे लिये जा रहा था। गिरिजा उसका हाथ पकड़कर अपने पास बैठा सकती थी, पर उसने हाथ को धीरे-धीरे छूटने दिया था। वह एक ऐसा ख्वाब थी, जो हकीकत के छोर को छूते ही सहम गई थी; पर जब तक वह हकीकत और अफसाने के बीच थी, उसने डैनी को अपने मखमली आगोश में बेपनाह रोमांच दिया था। सच्चे प्रेम को एक अलग, विशिष्ट और विचित्र ढंग से रेखांकित करता अत्यंत पठनीय उपन्यास।..
Pustak Details
Sold ByPrabhat Prakashan
AuthorAshwini Bhatnagar
ISBN-139789387968660
Edition1
FormatHardcover
LanguageHindi
Pages184
Publication Year2019
CategoryBooks/Literature & Fiction/Indian Writing

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Book Description

Adbhut Prem ki Vichitra Katha - Hardcover

डैनी अमीरों का नौशा बनकर दूर कहीं चमकते सितारे से उठी झंकार के साथ बह गया था। झंकार खत्म नहीं हुई थी, पर उसका बहना ठहर गया था। उसके पैर जम रहे थे और हालाँकि दूर सितारे की सदा उसके जेहन में अब भी गूँज रही थी, पर उसकी कंपन अब महसूस नहीं हो रही थी। डैनी ने गिरिजा को बेहद चाहा था। उसका साथ पाकर उसे लगा था कि दुनिया में उससे बड़ा खुशनसीब कोई नहीं था। वह गिरिजा में घुला जा रहा था, पर बुलावा उसको खींचे लिये जा रहा था। गिरिजा उसका हाथ पकड़कर अपने पास बैठा सकती थी, पर उसने हाथ को धीरे-धीरे छूटने दिया था। वह एक ऐसा ख्वाब थी, जो हकीकत के छोर को छूते ही सहम गई थी; पर जब तक वह हकीकत और अफसाने के बीच थी, उसने डैनी को अपने मखमली आगोश में बेपनाह रोमांच दिया था। सच्चे प्रेम को एक अलग, विशिष्ट और विचित्र ढंग से रेखांकित करता अत्यंत पठनीय उपन्यास।
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